कोरोना के वीर योद्धा आप हो
मां के प्यार व पिता के स्नेह के साथ
अकाल हो ,सूखा हो ,बाढ़ हो या फिर प्लेग या चेचक का प्रकोप हो ऐसे हर मौक़े पर हम हिंदुस्तानी बस गैस स्टोव्स पर कढ़ाई चढ़ाते हैं और गुलाबजामुन और कचौरियाँ बनाने लगते हैं ! विपत्तियाँ ,आपदायें जब यह सब देखती है तो मुँह खुले के खुले रह जाते हैं उनके ! वो उम्मीद कर रही होती है कि उनके आने से लोग पछाड़ें खायेंगे ! थर-थर काँपेंगे या पूंछ दबा लेंगे ! पर जब वो देखती है कि हिंदुस्तानियों ने उसके आने की खबर सुनते ही जलेबियाँ बनाने के लिये मैदा घोलना शुरू कर दिया है तो उनके हौसले पस्त हो जाते हैं ! उनकी रणनीति ध्वस्त हो जाती है हमारे ऐसे बर्ताव पर ! ऐसे लोगों को आप कैसे हरा सकते हैं जो आपको गिन ही ना रहे हो ! आपसे डरने को तैयार ही ना हो ! अपना बरमूडा और रंगीन शर्ट पहन कर अपनी कॉलोनी के कैम्पस में डकारें लेते हुये ऐसे टहल रहे हो जैसे गोवा में समंदर किनारे हो !
दुनिया में हम अकेले ऐसे अनोखे लोग है जो किसी भी वजह से मिली छुट्टियों को त्योहार में बदल सकते हैं और किसी भी त्योहार पर संडे पड़ जाने से अनमने हो जाते हैं ! किसी भी वजह से मिली छुट्टियों में किसी बड़े नेता के अचानक पैदा हो जाने या चल बसने वाली छुट्टी शामिल हैं ! ये सब वो मौक़े होते हैं जब हम अपनी थाली में कटोरियाँ सजा लें ! अब कोरोना की वजह से मिली छुट्टियों को ही ले लीजिये ! हालात ये है कि बीबी के अलावा नाकारा लड़के भी किचन में अपना जौहर दिखाने पर उतारू है ! लौकी भी हलवा होकर गदगद है और आलू हैरान हुआ पड़ा है ! उसे खुद पता नहीं था कि वो इतना होनहार है ! अपनी इज़्ज़त होते देख उसका खुद पर इतना भरोसा बढ़ चुका है कि मौक़ा मिलने पर कोरोना को अकेले ही पटक ले ! ये बात अलग है कि कढ़ाई लगातार चूल्हे पर चढ़ी होने से परेशान है यदि मानव अधिकार आयोग की तरह कोई कढ़ाई अधिकार आयोग होता तो दो तिहाई हिंदुस्तानी अभी जेल में होते !
ये ऐसे दिन हैं जब दुनिया के तमाम परेशानी भरे मुद्दे गुलाबजामुनो की चाशनी में डूब तक दम तोड़ चुके !
कश्मीर ,पाकिस्तान,ग़रीबी ,बेरोज़गारी महंगाई जैसे अजर अमर मुद्दे इन दिनों अपच का शिकार है और इनो तलाश रहे हैं ! औरतो को छोड़िये आदमी भी अपने दोस्तों से कोरोना के अलावा आलूबंडा ,पापड़ी चाट और ख़स्ता कचौरियों पर ही गहन विचार विमर्श कर रहा है ! हिंदुस्तानियो के सपनो में आजकल हुमा क़ुरैशी के आने की गु्जाईंश रही नही ! जलेबियाँ उसे वहाँ से विस्थापित कर चुकी ! अपने ऐसे बुरे दिनों से हुमा खुद परेशान है ,शर्मिंदा है ! अपनी रसोई में घुसी है और वहाँ से निकलने को तैयार नहीं है !
यदि किसी समझदार महिला को मेरे लिखे पर यक़ीन नहीं तो वो पहली फ़ुरसत में अपने पति को तौल कर देख लें ! लगातार चढ़ी कढ़ाई से लगातार निकलते समोसों और पकौड़ों ने अब तक उसका आयतन बढ़ा ही दिया होगा ! मेरी सलाह मानें ! यदि ऐसा हो भी चुका हो तो ना पछताने की ज़रूरत है ना कढ़ाई पर तरस खाने की ही कोई मतलब है ! कोरोना के ख़िलाफ़ चल रही लड़ाई है ये ! और आप फ़ौजी है ! आपको बस लड़ते रहना है और इस बात पर यक़ीन करना है ऐसा करके आप अपने परिवार को और देश को बचा रही है !
भरोसा कीजिये मेरा ! चमगादड़ और मेंढक खाने वालो के देश से आया कोरोना यदि हारेगा तो हमारे गुलाबजामुनो ,जलेबियों और कचौरियों से ही हारेगा ! हमारे गोलगप्पों, छोले भटूरो और दही बड़ों का सामना कर सके ,इतनी औक़ात नहीं उसकी ! तो अपना कॉन्फ़िडेंस बनाये रखिये ! राष्ट्र हित में लगातार बनाते और खाते रहिये ! क्योंकि यही हमें आता है और यही कोरोना का इकलौता इलाज है !
:- "आनन्द मिश्रा"
हर हिन्दुस्तानी।
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